こんにちは!のぶやんです。
今回は、天気のことわざ「朝霧は晴れ」についてそんな風に言われる理由について解説していきます。

僕の簡単なプロフィールです。
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朝霧は晴れってどういう意味?
天気のことわざに「朝霧は晴れ」と言うのがありますが、なんでそんな風にいわれるのでしょう?
朝に濃い霧が発生するような時には空がしっかり晴れていて夜間に放射冷却が起こります。
夜間に放射冷却が効くときっていうのは、高気圧に覆われていて晴れていて風も弱い時です。
放射冷却によって空気が冷やされて空気中にある水蒸気が霧となります(この放射冷却によってできた霧のことを放射霧といいます)。
そして夜間に発生した霧は朝まで残りますが、高気圧に覆われてるので太陽の日差しにより気温が上昇して霧は消散して、日中も天気が良いので「朝霧は晴れ」といわれるようになりました。
このことわざが起こりやすいのは、季節だと春や秋で、前線や低気圧通過により雨が降った後に移動性高気圧に覆われている時です。
朝霧は晴れとなった事例を紹介します
実際にこの天気のことわざどおり「朝霧は晴れ」となった事例を紹介しましょう。
2018年5月14日の福岡県は朝濃霧が発生していて、濃霧注意報も発表されていました。
実際にその日の実況を残してくれている方のつぶやきをもってきました。
天気図でみるとこんな感じで福岡県は西の高気圧に覆われてきています。

福岡県の内陸の観測所である飯塚の観測データをもってきました。
天気が良くて、風も弱いため放射冷却によって未明~明け方あたりは霧が発生していたものとみられます。
日中は太陽が昇ってくることによって気温が上がって霧は解消して晴れていました。

この濃霧となった原因としては、何なのかというと前日(5月13日)に前線が通過して雨が降っていたことが挙げられます。
天気図をみると福岡県付近は前線が停滞しています。

前線の影響で飯塚でも雨が日中まとまった雨が降ってますね。

しっかり前日雨がしっかり降ったあとに、高気圧に覆われてスカッと晴れて放射がきいて気温が下がって14日の朝には霧が発生してたってことですね~。
実例でもわかるとおり、前線や低気圧通過により雨が降って高気圧に覆われて晴れるっていう時に霧がでやすいパターンかなと思います。
出た翌朝はよく晴れる」という言い伝えを、皆さんも一度は耳にしたことがあるのではないでしょうか。気象予報士の勉強をしていると、放射冷却によって発生する霧(放射霧)は、よく晴れて風が弱い夜にできやすいと習います。ということは、霧が出たということは大気が安定していて、翌日も晴れる可能性が高いはず——。今回はこの素朴な疑問を、宮崎の実際の観測データを使ってきちんと数字で検証してみました。
事例2 過去30年の記録を使って宮崎で霧がでると晴れるのか?検証してみる
続いてのもう一つ大規模に検証を行ってみました。
宮崎市内には、大淀川という大きなが流れていてそこでできた霧が宮崎の気象台に流れてくることがあります。
気象台では霧が観測もしているので、実際その霧が出た時は晴れなのか?過去30年ほど(1990年~2020年)でその日本当に晴れたのか?を調べてみました。

使ったのは気象庁の「過去の気象データ検索」で公開されている、宮崎地点の観測値です。期間は1990年から2020年までの31年分。まず日ごとの天気概況を1か月ずつすべて調べ、「霧」または「霧を伴う」と記載された日を抜き出しました。概況は昼(06〜18時)と夜(18〜翌06時)に分かれているので、どちらに霧が出たかも区別しています。
そのうえで「晴れたかどうか」の判定ルールを決めました。
昼の概況に霧があった日は、その日の9時または12時の天気が晴れなら〇。
夜の概況に霧があった日(夜と言っても明け方とかに結構出るので)は、翌日の午前中(0〜12時のうち実測のある3・6・9・12時)に晴れが現れたら〇としました。
気象庁の時別天気は3時間おきの記録なので、この4つの時刻でチェックしています。
結果:霧の翌は8割近くが晴れ
31年間で霧が記載された事例は、昼・夜を合わせて全315事例ありました。
そのうち、判定ルールで「晴れ」となったのは252事例。つまり、宮崎で霧が出ると(夜の場合はその翌日に)晴れる確率は約80%という結果になりました。
言い伝えはなかなか信頼できる数字だと言えそうです。
年によっては100%(1994・1997・1999年)のときもありましたが、一方で1991年のように50%前後にとどまる年もあります。もっとも、事例数が少ない年は割合が極端に振れやすいので、傾向を見るなら全期間の約80%という数字が最も落ち着いた指標だと考えています。
「薄曇り」も含めると約87%に
さらに「すっきり晴れたわけではないけれど、ばっちり曇ってもいない」という状態も含めてみるとどうなるか、「薄曇」も〇に加えて再集計してみたところ、全315事例のうち274事例が〇となり、確率は約87%まで上がりました。
晴れのみの約80%と比べると、7ポイントほど高くなる計算です。
検証結果データ(年別の晴れ率)
ここからは、実際に集計した結果を表でまとめます。下の表は「晴れのみ」を〇とした基準での、年ごとの霧の事例数・晴れた数・晴れ率です。事例数は昼・夜それぞれの概況をひとつと数えています。
| 年 | 霧の事例数 | 晴れた数(〇) | 晴れ率 |
|---|---|---|---|
| 1990 | 12 | 10 | 83.3% |
| 1991 | 7 | 3 | 42.9% |
| 1992 | 9 | 6 | 66.7% |
| 1993 | 15 | 12 | 80.0% |
| 1994 | 8 | 8 | 100.0% |
| 1995 | 7 | 5 | 71.4% |
| 1996 | 5 | 3 | 60.0% |
| 1997 | 2 | 2 | 100.0% |
| 1998 | 6 | 4 | 66.7% |
| 1999 | 4 | 4 | 100.0% |
| 2000 | 7 | 6 | 85.7% |
| 2001 | 10 | 8 | 80.0% |
| 2002 | 8 | 6 | 75.0% |
| 2003 | 11 | 10 | 90.9% |
| 2004 | 24 | 20 | 83.3% |
| 2005 | 13 | 10 | 76.9% |
| 2006 | 15 | 12 | 80.0% |
| 2007 | 8 | 7 | 87.5% |
| 2008 | 7 | 5 | 71.4% |
| 2009 | 11 | 10 | 90.9% |
| 2010 | 11 | 10 | 90.9% |
| 2011 | 12 | 11 | 91.7% |
| 2012 | 17 | 12 | 70.6% |
| 2013 | 6 | 4 | 66.7% |
| 2014 | 10 | 7 | 70.0% |
| 2015 | 12 | 9 | 75.0% |
| 2016 | 17 | 13 | 76.5% |
| 2017 | 5 | 4 | 80.0% |
| 2018 | 19 | 18 | 94.7% |
| 2019 | 5 | 4 | 80.0% |
| 2020 | 12 | 9 | 75.0% |
| 合計 | 315 | 252 | 80.0% |
さらに、どの日が晴れて(〇)、どの日がダメだった(×)のか、全315事例の明細も載せておきます。件数が多いので、下の表は枠内を上下にスクロールしてご覧ください。
| 年 | 日付 | 昼/夜 | 判定 |
|---|---|---|---|
| 1990 | 2/1 | 夜 | 〇 |
| 1990 | 2/4 | 夜 | 〇 |
| 1990 | 2/8 | 夜 | × |
| 1990 | 2/9 | 昼 | × |
| 1990 | 7/9 | 夜 | 〇 |
| 1990 | 7/10 | 夜 | 〇 |
| 1990 | 9/20 | 夜 | 〇 |
| 1990 | 10/31 | 昼 | 〇 |
| 1990 | 12/9 | 夜 | 〇 |
| 1990 | 12/20 | 夜 | 〇 |
| 1990 | 12/21 | 昼 | 〇 |
| 1990 | 12/31 | 夜 | 〇 |
| 1991 | 1/1 | 夜 | 〇 |
| 1991 | 4/17 | 昼 | × |
| 1991 | 4/17 | 夜 | × |
| 1991 | 5/22 | 夜 | × |
| 1991 | 5/23 | 昼 | × |
| 1991 | 12/6 | 夜 | 〇 |
| 1991 | 12/7 | 昼 | 〇 |
| 1992 | 5/18 | 夜 | 〇 |
| 1992 | 6/15 | 夜 | × |
| 1992 | 6/16 | 昼 | × |
| 1992 | 6/19 | 夜 | 〇 |
| 1992 | 6/25 | 夜 | × |
| 1992 | 8/9 | 夜 | 〇 |
| 1992 | 8/10 | 昼 | 〇 |
| 1992 | 9/2 | 夜 | 〇 |
| 1992 | 12/20 | 夜 | 〇 |
| 1993 | 3/28 | 昼 | × |
| 1993 | 4/2 | 夜 | 〇 |
| 1993 | 4/3 | 昼 | 〇 |
| 1993 | 5/18 | 夜 | 〇 |
| 1993 | 7/8 | 夜 | 〇 |
| 1993 | 7/25 | 夜 | 〇 |
| 1993 | 8/18 | 夜 | 〇 |
| 1993 | 8/20 | 夜 | 〇 |
| 1993 | 8/21 | 昼 | 〇 |
| 1993 | 9/15 | 昼 | × |
| 1993 | 9/25 | 昼 | 〇 |
| 1993 | 10/1 | 夜 | 〇 |
| 1993 | 10/2 | 昼 | 〇 |
| 1993 | 11/19 | 昼 | 〇 |
| 1993 | 11/26 | 夜 | × |
| 1994 | 1/3 | 夜 | 〇 |
| 1994 | 1/13 | 夜 | 〇 |
| 1994 | 3/3 | 夜 | 〇 |
| 1994 | 5/12 | 夜 | 〇 |
| 1994 | 5/13 | 昼 | 〇 |
| 1994 | 5/29 | 夜 | 〇 |
| 1994 | 12/12 | 昼 | 〇 |
| 1994 | 12/26 | 夜 | 〇 |
| 1995 | 2/19 | 夜 | 〇 |
| 1995 | 2/20 | 昼 | 〇 |
| 1995 | 4/6 | 夜 | 〇 |
| 1995 | 4/30 | 夜 | × |
| 1995 | 5/1 | 昼 | × |
| 1995 | 10/29 | 夜 | 〇 |
| 1995 | 12/11 | 夜 | 〇 |
| 1996 | 5/2 | 夜 | 〇 |
| 1996 | 5/3 | 昼 | × |
| 1996 | 6/5 | 夜 | 〇 |
| 1996 | 9/26 | 夜 | × |
| 1996 | 11/27 | 昼 | 〇 |
| 1997 | 8/13 | 夜 | 〇 |
| 1997 | 8/14 | 昼 | 〇 |
| 1998 | 2/1 | 夜 | 〇 |
| 1998 | 2/2 | 昼 | 〇 |
| 1998 | 5/6 | 夜 | × |
| 1998 | 6/24 | 夜 | × |
| 1998 | 11/30 | 夜 | 〇 |
| 1998 | 12/1 | 昼 | 〇 |
| 1999 | 4/20 | 夜 | 〇 |
| 1999 | 4/21 | 昼 | 〇 |
| 1999 | 9/2 | 夜 | 〇 |
| 1999 | 11/23 | 夜 | 〇 |
| 2000 | 1/2 | 夜 | 〇 |
| 2000 | 5/17 | 夜 | 〇 |
| 2000 | 5/18 | 昼 | 〇 |
| 2000 | 10/8 | 夜 | 〇 |
| 2000 | 12/14 | 夜 | 〇 |
| 2000 | 12/19 | 夜 | 〇 |
| 2000 | 12/20 | 昼 | × |
| 2001 | 2/18 | 夜 | 〇 |
| 2001 | 4/21 | 夜 | 〇 |
| 2001 | 4/22 | 昼 | 〇 |
| 2001 | 6/23 | 夜 | 〇 |
| 2001 | 9/3 | 夜 | 〇 |
| 2001 | 9/4 | 昼 | 〇 |
| 2001 | 10/29 | 夜 | 〇 |
| 2001 | 10/30 | 昼 | 〇 |
| 2001 | 12/17 | 夜 | × |
| 2001 | 12/18 | 昼 | × |
| 2002 | 2/5 | 夜 | 〇 |
| 2002 | 2/27 | 昼 | × |
| 2002 | 3/3 | 昼 | 〇 |
| 2002 | 6/26 | 夜 | 〇 |
| 2002 | 6/27 | 昼 | × |
| 2002 | 7/1 | 夜 | 〇 |
| 2002 | 11/16 | 夜 | 〇 |
| 2002 | 11/17 | 昼 | 〇 |
| 2003 | 2/1 | 夜 | 〇 |
| 2003 | 2/11 | 昼 | × |
| 2003 | 2/16 | 夜 | 〇 |
| 2003 | 2/17 | 昼 | 〇 |
| 2003 | 8/17 | 夜 | 〇 |
| 2003 | 8/18 | 夜 | 〇 |
| 2003 | 9/2 | 昼 | 〇 |
| 2003 | 9/25 | 夜 | 〇 |
| 2003 | 9/26 | 昼 | 〇 |
| 2003 | 11/6 | 夜 | 〇 |
| 2003 | 11/30 | 夜 | 〇 |
| 2004 | 1/17 | 夜 | 〇 |
| 2004 | 1/18 | 昼 | 〇 |
| 2004 | 3/12 | 夜 | 〇 |
| 2004 | 3/13 | 昼 | 〇 |
| 2004 | 3/15 | 昼 | 〇 |
| 2004 | 4/14 | 夜 | 〇 |
| 2004 | 4/15 | 昼 | 〇 |
| 2004 | 5/9 | 夜 | 〇 |
| 2004 | 5/10 | 昼 | 〇 |
| 2004 | 5/11 | 夜 | × |
| 2004 | 5/12 | 昼 | × |
| 2004 | 5/29 | 夜 | 〇 |
| 2004 | 5/30 | 昼 | 〇 |
| 2004 | 6/6 | 夜 | 〇 |
| 2004 | 6/7 | 昼 | 〇 |
| 2004 | 8/6 | 夜 | 〇 |
| 2004 | 9/2 | 夜 | 〇 |
| 2004 | 11/24 | 夜 | 〇 |
| 2004 | 12/10 | 昼 | 〇 |
| 2004 | 12/12 | 夜 | 〇 |
| 2004 | 12/13 | 昼 | 〇 |
| 2004 | 12/17 | 昼 | 〇 |
| 2004 | 12/18 | 夜 | × |
| 2004 | 12/19 | 昼 | × |
| 2005 | 1/23 | 夜 | × |
| 2005 | 1/24 | 昼 | × |
| 2005 | 4/9 | 夜 | 〇 |
| 2005 | 4/10 | 昼 | 〇 |
| 2005 | 5/2 | 夜 | 〇 |
| 2005 | 5/3 | 昼 | 〇 |
| 2005 | 5/4 | 夜 | 〇 |
| 2005 | 6/24 | 夜 | 〇 |
| 2005 | 6/25 | 昼 | 〇 |
| 2005 | 10/14 | 夜 | × |
| 2005 | 11/3 | 夜 | 〇 |
| 2005 | 11/14 | 夜 | 〇 |
| 2005 | 11/15 | 昼 | 〇 |
| 2006 | 1/16 | 夜 | 〇 |
| 2006 | 1/17 | 昼 | 〇 |
| 2006 | 2/21 | 夜 | 〇 |
| 2006 | 3/6 | 夜 | 〇 |
| 2006 | 3/7 | 昼 | 〇 |
| 2006 | 3/18 | 昼 | × |
| 2006 | 3/18 | 夜 | 〇 |
| 2006 | 3/22 | 夜 | × |
| 2006 | 3/26 | 夜 | 〇 |
| 2006 | 4/5 | 夜 | 〇 |
| 2006 | 4/6 | 昼 | 〇 |
| 2006 | 4/23 | 昼 | × |
| 2006 | 11/19 | 夜 | 〇 |
| 2006 | 12/8 | 昼 | 〇 |
| 2006 | 12/26 | 夜 | 〇 |
| 2007 | 1/21 | 夜 | 〇 |
| 2007 | 3/27 | 夜 | 〇 |
| 2007 | 4/19 | 昼 | 〇 |
| 2007 | 6/20 | 夜 | 〇 |
| 2007 | 6/21 | 昼 | × |
| 2007 | 10/27 | 昼 | 〇 |
| 2007 | 11/9 | 昼 | 〇 |
| 2007 | 11/29 | 夜 | 〇 |
| 2008 | 1/11 | 夜 | 〇 |
| 2008 | 3/27 | 夜 | 〇 |
| 2008 | 6/17 | 夜 | × |
| 2008 | 6/18 | 昼 | × |
| 2008 | 7/26 | 夜 | 〇 |
| 2008 | 10/14 | 夜 | 〇 |
| 2008 | 12/9 | 夜 | 〇 |
| 2009 | 3/31 | 夜 | 〇 |
| 2009 | 4/5 | 夜 | 〇 |
| 2009 | 6/20 | 夜 | 〇 |
| 2009 | 7/5 | 夜 | 〇 |
| 2009 | 7/6 | 昼 | 〇 |
| 2009 | 8/1 | 夜 | × |
| 2009 | 11/23 | 昼 | 〇 |
| 2009 | 11/25 | 夜 | 〇 |
| 2009 | 11/26 | 昼 | 〇 |
| 2009 | 11/28 | 昼 | 〇 |
| 2009 | 11/29 | 夜 | 〇 |
| 2010 | 2/23 | 夜 | 〇 |
| 2010 | 2/24 | 昼 | 〇 |
| 2010 | 5/20 | 夜 | 〇 |
| 2010 | 6/23 | 夜 | 〇 |
| 2010 | 6/24 | 昼 | × |
| 2010 | 10/2 | 夜 | 〇 |
| 2010 | 10/3 | 昼 | 〇 |
| 2010 | 10/9 | 夜 | 〇 |
| 2010 | 10/24 | 夜 | 〇 |
| 2010 | 11/14 | 夜 | 〇 |
| 2010 | 11/22 | 夜 | 〇 |
| 2011 | 1/23 | 夜 | 〇 |
| 2011 | 2/28 | 昼 | 〇 |
| 2011 | 5/20 | 夜 | × |
| 2011 | 6/5 | 夜 | 〇 |
| 2011 | 6/6 | 昼 | 〇 |
| 2011 | 6/8 | 夜 | 〇 |
| 2011 | 7/8 | 夜 | 〇 |
| 2011 | 7/9 | 夜 | 〇 |
| 2011 | 7/10 | 昼 | 〇 |
| 2011 | 10/21 | 夜 | 〇 |
| 2011 | 11/7 | 夜 | 〇 |
| 2011 | 11/8 | 昼 | 〇 |
| 2012 | 1/16 | 夜 | 〇 |
| 2012 | 1/17 | 昼 | 〇 |
| 2012 | 2/13 | 夜 | × |
| 2012 | 5/2 | 夜 | 〇 |
| 2012 | 7/9 | 夜 | 〇 |
| 2012 | 7/10 | 昼 | 〇 |
| 2012 | 7/15 | 夜 | 〇 |
| 2012 | 7/16 | 昼 | 〇 |
| 2012 | 7/21 | 夜 | 〇 |
| 2012 | 7/22 | 昼 | 〇 |
| 2012 | 8/29 | 昼 | 〇 |
| 2012 | 8/29 | 夜 | × |
| 2012 | 8/30 | 昼 | × |
| 2012 | 9/8 | 夜 | 〇 |
| 2012 | 11/30 | 夜 | 〇 |
| 2012 | 12/2 | 夜 | × |
| 2012 | 12/3 | 昼 | × |
| 2013 | 1/23 | 夜 | 〇 |
| 2013 | 7/2 | 夜 | × |
| 2013 | 9/1 | 夜 | × |
| 2013 | 10/20 | 夜 | 〇 |
| 2013 | 10/21 | 昼 | 〇 |
| 2013 | 12/18 | 夜 | 〇 |
| 2014 | 1/3 | 夜 | 〇 |
| 2014 | 1/14 | 夜 | 〇 |
| 2014 | 7/7 | 夜 | × |
| 2014 | 7/8 | 昼 | × |
| 2014 | 8/3 | 夜 | 〇 |
| 2014 | 9/3 | 夜 | × |
| 2014 | 9/5 | 夜 | 〇 |
| 2014 | 11/21 | 夜 | 〇 |
| 2014 | 11/22 | 昼 | 〇 |
| 2014 | 11/22 | 夜 | 〇 |
| 2015 | 3/7 | 夜 | 〇 |
| 2015 | 3/8 | 昼 | 〇 |
| 2015 | 3/16 | 夜 | 〇 |
| 2015 | 5/9 | 夜 | 〇 |
| 2015 | 5/16 | 夜 | × |
| 2015 | 6/3 | 夜 | 〇 |
| 2015 | 6/20 | 夜 | × |
| 2015 | 6/28 | 夜 | 〇 |
| 2015 | 9/18 | 夜 | 〇 |
| 2015 | 11/16 | 昼 | 〇 |
| 2015 | 11/23 | 夜 | 〇 |
| 2015 | 12/23 | 夜 | × |
| 2016 | 1/3 | 夜 | 〇 |
| 2016 | 1/6 | 夜 | 〇 |
| 2016 | 1/12 | 昼 | 〇 |
| 2016 | 4/8 | 夜 | × |
| 2016 | 4/9 | 昼 | × |
| 2016 | 7/6 | 夜 | 〇 |
| 2016 | 9/4 | 夜 | 〇 |
| 2016 | 9/5 | 昼 | 〇 |
| 2016 | 9/14 | 夜 | 〇 |
| 2016 | 9/25 | 夜 | × |
| 2016 | 9/28 | 昼 | × |
| 2016 | 10/23 | 夜 | 〇 |
| 2016 | 11/15 | 夜 | 〇 |
| 2016 | 11/18 | 夜 | 〇 |
| 2016 | 11/21 | 夜 | 〇 |
| 2016 | 11/22 | 昼 | 〇 |
| 2016 | 12/13 | 夜 | 〇 |
| 2017 | 1/18 | 夜 | 〇 |
| 2017 | 3/23 | 夜 | 〇 |
| 2017 | 3/24 | 昼 | 〇 |
| 2017 | 8/21 | 夜 | × |
| 2017 | 11/26 | 夜 | 〇 |
| 2018 | 2/1 | 夜 | 〇 |
| 2018 | 2/2 | 昼 | 〇 |
| 2018 | 2/26 | 昼 | 〇 |
| 2018 | 3/3 | 夜 | 〇 |
| 2018 | 4/25 | 夜 | 〇 |
| 2018 | 4/26 | 昼 | 〇 |
| 2018 | 5/9 | 夜 | 〇 |
| 2018 | 5/10 | 昼 | 〇 |
| 2018 | 5/15 | 夜 | 〇 |
| 2018 | 5/16 | 昼 | 〇 |
| 2018 | 5/26 | 夜 | 〇 |
| 2018 | 6/7 | 夜 | × |
| 2018 | 7/22 | 夜 | 〇 |
| 2018 | 7/23 | 昼 | 〇 |
| 2018 | 8/24 | 夜 | 〇 |
| 2018 | 11/19 | 夜 | 〇 |
| 2018 | 11/28 | 夜 | 〇 |
| 2018 | 11/29 | 昼 | 〇 |
| 2018 | 12/22 | 昼 | 〇 |
| 2019 | 2/25 | 夜 | 〇 |
| 2019 | 7/2 | 夜 | × |
| 2019 | 10/18 | 夜 | 〇 |
| 2019 | 12/22 | 夜 | 〇 |
| 2019 | 12/23 | 昼 | 〇 |
| 2020 | 2/7 | 夜 | 〇 |
| 2020 | 2/15 | 夜 | × |
| 2020 | 5/3 | 夜 | 〇 |
| 2020 | 6/1 | 夜 | 〇 |
| 2020 | 7/16 | 夜 | × |
| 2020 | 7/17 | 昼 | × |
| 2020 | 9/11 | 夜 | 〇 |
| 2020 | 9/20 | 夜 | 〇 |
| 2020 | 9/21 | 昼 | 〇 |
| 2020 | 9/30 | 夜 | 〇 |
| 2020 | 12/27 | 夜 | 〇 |
| 2020 | 12/28 | 夜 | 〇 |
1990年から2020年までの宮崎のデータを調べた結果、霧が出たとき(夜の場合はその翌日)に晴れる確率は約80%、薄曇りまで含めれば約87%という結果になりました。
「霧の翌朝は晴れる」という昔ながらの言い伝えは、少なくとも宮崎に関してはおおむね正しいと言えそうです。朝霧の日は、そのうち晴れ上がると期待して良さそうですね。
他の地点でも同じ傾向が見られるのか、また機会があれば検証してみたいと思います。
まとめ
今回の内容についてまとめました。
- 夜間に放射冷却が効くときっていうのは、高気圧に覆われて天気も良く風も弱い時
- 放射冷却によって夜間に発生した霧は朝まで残るけど、高気圧に覆われてるので太陽の日差しにより気温が上昇して霧は消散し、日中も天気が良いので「朝霧は晴れ」といわれるようになった
- 「朝霧は晴れ」となりやすいのは、季節は春や秋で前線や低気圧が通過したあと移動性高気圧に覆われるとき
以上が、「「朝霧は晴れ」っていわれるのはなぜ?理由は?解説します」でした。
読んでいただきありがとうございました。



